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डॉ पी नीलकंठन
डॉ एस आर वल्लूरी
प्रोः आर नरसिंहा
डॉ के एन राजू
प्रोः सतीश धावन
डॉ आर ए माशेलकर
डॉ पी राममूर्ति
प्रोः यू आर राव
डॉ बी आर सोमशेखर
श्री के वेंकटाचलम
डॉ के एस यज्ञिक
डॉ एम वी वी मूर्ति
डॉ ए सी रघुराम
डॉ इंदिरा राजगोपाल
डॉ एस श्रीनाथकुमार
डॉ एम शिवकुमार स्वामी
डॉ एस नागभूषण
डॉ जे पी पिच्चमुत्तू
डॉ श्रीनिवास भोगले
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डॉ पी नीलकंठन
राष्ट्रीय वांतरिक्ष प्रयोगशालाऍं को भारतीय स्वतंत्रता के स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में आज के इस विशेष स्थापना दिवस समारोह पर अपने प्रथम निदेशक, डॉ परमेश्वर नीलकंठन को मरणोपरांत सम्मान करने का सौभाग्य है1 अधिक...
डॉ एस आर वल्लूरी
राष्ट्रीय वांतरिक्ष प्रयोगशालाऍं को भारतीय स्वतंत्रता के स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में आज के इस विशेष स्थापना दिवस समारोह पर डॉ सीताराज राव वल्लूरी को सम्मान करने का सौभाग्य है1 अधिक...
प्रोः आर नरसिंहा
राष्ट्रीय वांतरिक्ष प्रयोगशालाऍं को भारतीय स्वतंत्रता के स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में आज के इस विशेष स्थापना दिवस समारोह पर प्रो रोद्दम नरसिंहा को सम्मान करने का सौभाग्य है1 अधिक...
डॉ के एन राजू
राष्ट्रीय वांतरिक्ष प्रयोगशालाऍं को भारतीय स्वतंत्रता के स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में आज के इस विशेष स्थापना दिवस समारोह पर डॉ के केशवा नारायण राजू को सम्मान करने का सौभाग्य है1 अधिक...
प्रोः सतीश धावन
राष्ट्रीय वांतरिक्ष प्रयोगशालाऍं को भारतीय स्वतंत्रता के स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में आज के इस विशेष स्थापना दिवस समारोह पर प्रो सतीश धावन को सम्मान करने का सौभाग्य है1
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डॉ आर ए मशेलकर
एनएएल को डॉ रघुनाथ अनंत मशेलकर, महानिदेशक, सीएसआईआर तथा सचिव, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान
विभाग को लंदन के रायल सोसाईटी के फेलो होने पर सम्मान करने का सौभाग्य है1
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डॉ पंचगम राममूर्ति
डॉ पंचगम राममूर्ति, वैज्ञानिक एफ, सीटीएफडी प्रभाग एनएएल, बेंगलूर में वांतरिक्ष क्षेत्र में अपने सफल जीवन-वृत्ति के 30 साल समाप्त कर सेवा निवृत्त हो रहे हैं1
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डॉ बी आर सोमशेखर
डॉ बी आर सोमशेखर जो 35 सालों से एनएएल का एक हिस्सा ही थे जिनके बिना एनएएल अधूरा लग रहा है1 मूझे आज भी वह दिन याद है जब उनसे संरचना प्रभाग प्रधान पद को संभालने केलिए अनुरोध किया था, जब उनके पूर्वाधिकारी प्रतिनियुक्ति पर यूके गये थे, तब वे वैज्ञानिक ‘सी’ पद पर थे और वरीष्ठतम भी नहीं थे1 उसी समय मैंने यह जान लिया था कि वह एक अच्छा प्रशासक है और अच्छा वैज्ञानिक बनने की योग्यताऍं हैं और उन्होने यह साबित भी कर दिखाया1
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प्रोः यू आर राव
राष्ट्रीय वांतरिक्ष प्रयोगशालाऍं को भारतीय स्वतंत्रता के स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में आज के इस विशेष स्थापना दिवस समारोह पर प्रो यू आर राव को सम्मान करने का सौभाग्य है1 अधिक...
श्री एम वेंकटाचलम
मेरी श्री वेंकटाचलम से पहली मुलाकात 1970 के प्रारंभ में हुआ जब मैं वीआईटीएम (तब सीएसआईआर के तहत था) में था और श्री वेंकटाचलम वीआईटीएम की कई सलाहकार समितियों के सदस्य के रूप में म्यूजि़यम की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल थे1 मैं विश्वास नहीं कर सकता कि वह फुरतीला और जवान लड़का 60 साल का हो गया है और इस सप्ताह निवृत्त हो रहा है1 मुझे 1970 के और अब के वेंकटाचलम में कोई अंतर नहीं दिख रहा है1 उनका व्यवहार, रहन-सहन, स्नेहपूर्वक बातचीत और सुस्पष्ट स्वभाव बिलकुल नहीं बदला1 अधिक...
डॉ के एस यज्ञिक
यदि डॉ के एस यज्ञिक को हम सीएसआईआर गणितीय प्रतिरूपण एवं कम्प्यूटर अनुकरण केन्द्र (सीमैक्स) के निर्माता कहेंगे तो यह अतशियोक्ति नहीं होगी1 भारत में यह प्रतिरुपण के निर्माण पर जब उनको सराहा जा रहा था उनके साथ काम करने वाले उनके साथि ही यह प्रमाण करते हैं कि उनकी अथक ऊर्जा और उत्साह ही इस सीमैक्स के सपने को सच बनाया1 डॉ यज्ञिक ने हर काम में अपना ध्यान रखा, कुद भी नगण्य नहीं था1 बहुत ध्यान से उन्होने सीमैक्स के निर्माण में एक-एक घटक को चुना1 आज सीमैक्स में न केवल विश्व स्तरीय समकालीन कम्प्यूटर जिसमें उच्च निष्पादन वर्कस्टेशन सहित सूपर कम्प्यूटिंग सुवधिाऍं हैं पर वांचित अवसंरचना भी है1 अधिक... |
डॉ एम वी वी मूर्ति
डॉ एम वी वी मूर्ति, वैज्ञानिक ‘जी’ संरचना प्रभाग ने एनएएल में अपने उत्कृष्ट सेवाकाल समाप्त की1 डॉ मूर्ति 1998 फरवरी को सेवा निवृत्त डॉ एस नागभूषण के साथ एनएएल में लंबी सेवाकाल तक रहने वाले वैज्ञानिक हैं1
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डॉ ए सी रघुराम
डॉ ए सी रघुराम दिनांक 30 नवंबर 1999 को 60 वर्ष आयु पूरे होने पर एनएएल से सेवा निवृत्त हो रहे हैं1 उन्होने कहा कि 27 वर्ष कैसे बीते पता ही नहीं चला, अभी भी लगता है कि मैं कुछ ही दिन पहले एनएएल आया1 एनएएल में डॉ रघुराम का सेवा काल बहुत उत्कृष्ट रहा, खासतौर पर विफलता विश्लेषण समूह में, और अन्य क्षेत्रों में भी इनका योगदान रहा है, विशेष रूप से पौडर मेटलर्जी में1 अधिक...
डॉ इंदिरा राजगोपाल
डॉ इंदिरा राजगोपाल इस सप्ताह एनएएल के पृष्ठीय अभियांत्रकी एकक के प्रधान के पद से निवृत्त हुई1 सीएसाआईआर में उनके 42 वर्ष (1970 में एनएएल आने से पहले 12 वर्ष सीईसीआरआई, कारैकुडी में थी) अविस्मरणीय हैं और कई प्राप्तियॉं और सफलताओं से सजीं हैं कि यहॉं उनकी गणना नहीं कर सकते1 यह हमारा सौभाग्य है कि डॉ इंदिरा राजगोपाल सीएसआईआर की सेवामुक्त वैज्ञानिक के रूप में एनएएल को अपना सहयोग देती रहेंगी1 एनएएल के अगले पेस्टबोर्ड में डॉ इंदिरा राजगोपाल के संबंध में उनका पूरा विवरण देख सकते हैं1 वास्तव में मैं आभारी हूं श्री राजगोपालजी का जिनके कारण पदार्थ विज्ञान क्षेत्र में हमें उनकी पत्नी का योगदान प्राप्त हुआ1
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डॉ एस श्रीनाथकुमार-The X'=AX+BU man
डॉ एस श्रीनाथकुमार (एसएसके) मेरे गईड और परमर्शदाता को श्रद्धांजली देने में मैं अपना सौभाग्य समझता हूं1 हम 1978 से एनएएल के उड़ान यांत्रकी एवं नियंत्रण ग्रुप के साथि थे1 तब इस ग्रुप के प्रधान डॉ एस बालकृष्ण थे जो डॉ एस श्रीनाथकुमार को “X”=AX+BU man”कहते थे1 वे मानते थे कि एएसके बडे सैद्धांतिकवादी और पूर्णतावादी थे1अधिक...
डॉ एम शिवकुमार स्वामी
डॉ एम शिवकुमार स्वामी जो 30 वर्ष एनएएल में काम कर 31 मई 2001 को सेवा निवृत्त हो रहे हैं को वैमानिकी क्षेत्र के सर्वोत्कृष्ट अभियंता कह सकते हैं1 वे 1960-62 में एम.टेक. के साथ (तब वे प्रो. सतीष धावन के प्रेमपात्र शिष्य थे) अपनी जीवन-वृत्ति एनएएल से शुरू की (1962-1970) और जब डॉ एस आर वल्लूरी ने अपनी प्रयोगशाला को वायुयान परियोजनाओं में मदद केलिए आमंत्रत किया तो वे एनएएल आ गए (1970-2001)1 बीच में कुद अंतराल था जब वे विदेश गए खासतौर पर यूएसए के लॉकहुड1अधिक...
डॉ नागभूषण
वह अत्यंत दुखद दिन था जब मुझे डॉ नागभूषण को अलविदा कहना था1
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डॉ जे पी पिच्चमुत्तु
जोसेफ पी पिच्चुमुत्तु एक अनुपम व्यक्ति थे1 वे मृदु स्वाभाव के गतिशील और स्नेही व्यक्ति थे1 वे प्रो. सी एस पिच्चमुत्तु, पूर्व भूविज्ञानी के बेटे थे1 वे अपनी प्राथमिक पढ़ाई सिंगापुर में इंजीनियरिंग आईआईटी, खरगपुर से और लेज़र आप्टिक्स में पीएचडी इलिनॉयस विश्वविद्यालय से किया1
वायुयान यंत्रीकरण केलिए एनएएल को जो योगदान माना जाता है, वह श्रेय डॉ जे पी पिच्चमुत्तु को ही जाता है1 ज्यो का परोपकार गुण, उनकी अनुकंपा, केंपस के बच्चे जिन्हें अच्छी सुविधा प्राप्त नहीं है को भैतिकी पढ़ाने में उनका श्रम, केन्द्रीय विद्यालय को उनका योगदान महान है1 अधिक...
डॉ श्रीनिवास भोगले
एनएएल ने और एक असाधारण प्रतिभाशाली व्यक्ति को खोया1 यह शीर्षक पिछले कई वर्षों से स्वैच्छिक निवृत्ति और सेवा निवृत्ति की वजह से चला आ रहा है1 आज यह बहुत दुख से कहना पड़ रहा है कि ऐसे लेख लिखनेवाला लेखक ही इस कॉलम का शिकार बना1
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