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एनएएल नर्सरी स्कूल
एनएएल कैंपस के कोने में जाने से एक छोटा सा भवन मिलता है, वही है एनएएल नर्सरी स्कूल1 यह प्री –स्कूल एक दशक पहले एनएएल कर्मचारियों के बच्चों को केन्द्रीय विद्यालय और उसके पाठ्यक्रम से परिचित होने के लिए आरंभ किया था1 श्रीमती श्यामला वल्लूरी, एनएएल के पूर्व निदेशक डॉ एस आर वल्लूरी की पत्नी, स्कूल की प्रसन्नचित्त प्रिन्सिपाल है1 हम श्रीमती वल्लूरी से मिलेगें1
ये सब कैसे आरंभ हुए?
स्कूल शुरु करने के कई कारण हैं1 पहला, एनएएल केन्द्रीय विद्यालय में प्रवेश पाने केलिए बच्चों को प्रिपरेटरी स्कूल के रूप में सेवा प्रदान करना था लेकिन इससे भी ज्यादा यह है कि डॉ वल्लूरी और प्रो’सतीश धवन दोनों ने महसूस किया कि हमें एनएएल कर्मचािरयों के बच्चों को सक्रियता से प्रात्साहन करने हेतु रास्ता खोजना है विशेष रूप से अार्थिक रूप से पिछडे लोगों के बच्चों के लिए, जो बुदिध्मान होने पर भी पैसे की कमी के कारण स्कूल नहीं जा पाते1
स्कूल में आपने कैसे सेवा आरंभ किया ?
मैं उन दिनों सैनिक सेवा कोर्पस स्कूल में कार्यरत थी मैं वहां खुश नहीं थी क्यों कि वह बडा स्कूल था और मैं पढाने और बच्चों से मिलने से ज्यादा - जो सच में करना चाह रही थी, अपना ज्यादातर समय स्कूल के कर्मचारियों के प्रबंधन में व्यस्त थी1 जब डॉ श्रीनिवासन मुझ से नर्सरी स्कूल चलाने के लिए किसी को सुझाने के लिए कहा तो मैं यह कार्य खुद संभालने का प्रस्ताव किया1
यह कैसा था? आप स्कूल को आगे बढाने केलिए सोचा क्या?
नहीं, मुझे या तो लंबाई या चौडाई में इस स्कूल को बडा नहीं करना था1 बड़ी कक्षाओं से तुलना करने पर प्रि-स्कूल शिक्षण पूर्णतः अलग है1 स्कूल को चौडा करके ज्यादा बच्चे पाना एवं उनके लिए कम समय एवं ध्यान देना ठीक नहीं लगा1
आपने किसी नवीन रीति की शिक्षा का उपयोग किया?
हम किसी विशेष प्रशिक्षण पद्वति को नहीं अपनाया1 उदाहरण केलिए मॉन्टसरी पद्वति में शिक्षण के उपस्करों का प्रयोग करते है़1 लेकिन ये सब महंगे हैं तथा हमसे संभव नहीं है1 अतः हम चॉक, ब्लैक बोर्ड तथा मौखिक शिक्षण देते हैं सच कहा जाए तो, प्रि-स्कूल शिक्षण में बहुत ज्यादा शामिल हैं1 प्रत्येक बच्चे केलिए हमें समय देना है1 बच्चे को मानसिक बढावा तथा प्रोत्साहन की अधिक आवश्यकता है जो हम बच्चों को दे रहे हैं1 हमें ज्यादा प्रयास करना चाहिए1 पूरा विचार है कि बच्चों में अत्मनिर्भरता का विकास करना है1 अतः किसी अन्य से जयादा, मानसिक द्रष्टिकोण है1
परीक्षाओं के बारे में आपका क्या विचार है ?
प्रि-स्कूल स्तर पर हमें निरंतर रूप से बच्चों की परीक्षा लेनी है1 हर दिन आगे बढ़ने से पहले हमें देखना चाहिए कि बच्चा पिछले दिन सिखाए गए पाठ को सीखा है1 हमें सुनिश्चित करना है कि एक के बाद एक पढ़ाना चाहिए1 अतः यह देखने से पता चलता है कि बच्चों को हर दिन परीक्षा ली जा रही है1 शैक्षणिक वर्ष के अंत में हम परीक्षाएं चलाते हैं लेकिन जहां तक संभव है बोझ कम करते हैं1 प्रि-स्कूल सच में एक यादगार है1 बाद में विश्लेषण आता है1 सीखने के लिए शारीरिक समन्वय की जरूरत है जो बाद में भी आ सकता है1 एल के जी में ही बच्चे लिखना सीखते हैं और अपनी लिखावट को सुधार लेते हैं1 माता-पिता इसे नहीं समझते1 वे पूछते हैं कि क्यों बच्चा नहीं लिख पाता है, हमारे विवरण को नहीं सुनते1 हम होम वर्क भी देते हैं ताकि बच्चे को घर में लिखने का अभ्यास हो1 बच्चे के होम वर्क में मदद करने में माता-पिता की मदद का प्रोत्साहन हम नहीं देते1 बच्चे अपना काम खुद करने के लिए सीखना चाहिए1
पुरस्कार व सज़ा देते है क्या ?
बेशक, यह महत्वपूर्ण है1 हमें पुरस्कार व सज़ा दोनों देना है1 वास्तव में सिखाना ऐसा होता है जैसा कि हमारे पेट’स को सिखा रहे हैं1 मैं किसी को सज़ा नहीं देती1 दैहिक दण्ड देना मैं नहीं मानती1 बच्चे गलती करने पर मैं उन्हें एक कोने में रख देती हूं1 उन्हें लगेगा कि उन्हें बाहर कर दिया गया है1 वे दुबारा गलती नहीं करेंगे1 उदाहरण केलिए यदि कोई बच्चा दूसरे बच्चे को मारता है तो, मैं उसे खेलने नहीं देती तथा कक्षा में बैठने नहीं देती1 इससे निश्चय ही सुधार होता है1 उन्हें जो चाहिए उसे देने में देरी करें1 वही अच्छी सजा है1
पाठ्येतर गतिविधि के बारे में क्या है ?
हम ऐसी गतिविधियों का प्रोत्साहन देते हैं1 नर्सरी के बच्चे ज्यादातर खिलौनों से खेलते हैं1 बडे बच्चे मैदान पर खेलते हैं1 हमारे पास जिगसॉ पज़ल्स हैं जिनसे अनेक शारीरिक एवं मानसिक कुशलता बढ़ेगी1 खेलने से वे जल्दी सीखेंगे लेकिन इसे मॉ बाप नहीं समझते हैं1
वार्षिक दिन समारोह का आयोजन खुशी से होता है ?
हॉं, वह तो बहुत अच्छा रहता है1 बच्चे खूब पसंद करते हैं1 विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने हेतु उन्हें एक मौका मिलता है1 हम बच्चों को हिन्दी, कन्नड, मलयालम, तमिल भाषाओं में गाना तथा कुछ देश भक्ति के गाने सिखाते हैं1 हम बाल दिवस को धूम-धाम से मनाते हैं1 नवंबर 1 से 14 तक कई प्रतिभा प्रतियोगिताएं हैं जैसे चित्रण, कविता पाठ, खेल, गाना और अन्य1 खेल-कूद एक और बड़ा कार्यक्रम है1 सभी बच्चे सभी में भाग लेते हैं1 पूर्वाभ्यास ही एक महीना ले लेता है1 और इसमें सेमी फाइलन एवं फाइनल भी होते हैं1
असके अलावा उनकी कुशलता को बढ़ाने केलिए आपके पास दूसरे भी हैं?
हमारे पास समय सारणी है जिसमें चित्रण, कलरिंग, गाना गाना और अन्य गतिविधि भी हैं1
हर स्कूल में शरारती बच्चें होते हैं1 उन्हें आप कैसे संभालते हैं?
मैं उनसे बात करती हूं1 उन्हें अपनी गलती का महसूस कराती हूं1 उन्हें अलग रखती हूं1 वे इन खेलों से दूर रहना नहीं चाहते1 इस प्रकार वे सीखते हैं1 मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि मुझे अच्छी प्राध्यापिका मिली हैं जो मन से काम करती हैं और बच्चों को प्यार करती हैं1 अच्छी तरह से स्कूल चलाने केलिए यह महत्वपूर्ण है1
क्या आप जान बूझकर बड़ों को लेने की जगह छोटे बच्चों को लिया है?
जब मैं सैनिक सेवा कॉर्पस स्कूल में थी, मुझे छोटे बच्चों के साथ रहना अच्छा लगा अतः इसे मैं जारी रखी और अब मैं बडों से भी छोटे बच्चों के साथ काम करना पसंद करती हूं1 इसीलिए मैं स्कूल को बडा करने में इच्छुक नहीं हूं1
आपको क्या अधिक नैराश्य कर देता है?
जब बच्चे नहीं सुधरते हैं1 बच्चे सीखने में अपात्र बनना बहुत ही दुःखकर है1 हर साल में एक या दो रहते हैं1 मुझे लगता है कि मैं मॉ-बाप के साथ कुछ कर पाऊंगी1 यदि हम छोटे में नहीं करेंगे तो बाद में बढ जाएगा, जो मुझे बहुत असंतोष देता है1
स्कूल की निधि के बारे में क्या है? क्या निधि काफी है या चिंताजनक है?
निधि की बहुत कुछ समस्या है1 पानी तथा बिजली केलिए एनएएल देता है जिसके लिए मैं धन्यवाद देती हूं1 लेकिन हमें हमारे प्राध्यापकों को वेतन भुगतान करने में समस्या है1 लगभग 15 सालों से वेतन में कोई परिवर्तन नहीं है1 पिछले साल ही हम कुछ हद तक वेतन को बढ़ा पाएं1 हमने पाया कि हम योग्य विद्र्याथियों को रियायत नहीं दे सकेंगे1 मुझे बहुत खुशी हुई जब डॉ सोमशेखर और अन्यों ने प्रत्येक कक्षा में दो गरीब बच्चों की सहायता हेतु ट्रस्ट का आरंभ किया1 लेकिन इसके सिवाए हमारे पास कुछ नहीं1 हमें शुल्क बढ़ाना नहीं है1 लेकिन मुझे यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल हमेशा आकर्षित रहे1 इसमें दुविधा है1 मैं चाहती हूं कि हर साल एक बच्चे को प्रायोजित करने की हमारी योजना के समर्थन में लोग आगे आये1 मेरा मतलब इस प्रकार के लोग, जिनको कोई वित्तीय कठिनाई नहीं है, बच्चे भी ठीक ठाक है,
आपका रोल मॉडेल है?
एक नहीं, लेकिन बहुत हैं1 मेरे माता-पिता, एक या दो प्राध्यापक1 और कुछ ऐसे लोग जिनकी बात मुझे प्रभावित किया1
आपकी भविष्य की योजनाएं?
मुझे लगता है कि मैं लंबे समय से कर रही हूं1 लोग मुझे छोडने नहीं देते1 मुझे छोड़ना है1
सामान्य बातों को छोडने के बाद, स्कूलों में सरस्वती वंदना करने पर सरकार के हाल के निर्णय पर आपकी क्या राय है
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इसमें कोई समस्या नहीं है1 प्रत्येक बच्चा प्रार्थना में अपने भावों को अपनाना है1 कोई गलती नहीं है1 हम स्कूल में प्रार्थना को जितना संभव है उतना धर्म-निरपेक्ष बनाने की कोशशि करते हैं1
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