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इतिहास भारत में 38 सालों से वांतरिक्ष अ-वि में आगे |
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ऊपर जो चित्र आप देख रहे हैं (डाऊन लोड करने केलिए कुछ वक्त लगेगा) एनएएल के पुराने कर्मचारियों को विरही बना देगा1 यह चित्र 1960 के प्रारंभ का एनएएल पवन सुरंग केन्द्र को दर्शाता है1 बेलंदूर सरोवर (अब केवल कुरूप और प्रदूषित तालाब है जिसके कुछ ओर फूलों की राशि है) शांत और तेजस्वी लग रहा1 यहीं से एनएएल की कहानी शुरु होती है1 एनएएल की स्थापना 1 जून 1959 को दिल्ली में हुई जो 1 मार्च 1960 को बेंगलूर स्थानांतरित हुआ1 प्रारंभिक वर्ष (1960-67) बेलंदूर सरोवर पर पवन सुरंगों की स्थापना में ही बीत गए; मुख्यत: 1.2m ित्रध्वनिक अवधमन पवन सुरंग जो अभी भी अपनी भव्यता बनायी रखी है1 अगले दशक में संघटन, सुविधाऍं, वैमानिकी क्षेत्र् के हर प्रायोगिक पहलू को ध्यान में रखते हुए अनुसंधान एवं विकास प्रभागों का सृजन; सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक वायुगतिकी, संरचना, पदार्थ, नोदन इलेक्ट्रानिकी और प्रणाली1 वर्ष 1970 के मध्यंतर में भारतीय वैमानिकी क्षेत्र में एनएएल प्रमुख कर्ताधर्ता बन गया1 एनएएल को सीएसआईआर के एक उत्तम प्रबंधक राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं, जिसने वांतरिक्ष क्षेत्र के सैकडों उच्च विज्ञान, उच्च प्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं की जिम्मेदारी लिया, के रूप में मान्यता प्राप्त हुआ1 एनएएल के अ एवं वि प्रयास के तत्व हैं - उत्कृष्टता की ओर लक्ष्य, राष्ट्रीय रणनीति में अत्म-नर्भिरता, प्रौद्योगिकी प्रमाण (अधिकतर पाइलट प्लांट प्रदर्शन तत्व के माध्यम से) और उत्कृष्ट परीक्षण व सेवा सुवधिाओं का सृजन1 दख:द की बात है कि 1960 की प्रचण्ड सफलता के उपरांत 1970 की भारतीय वायुयान विकास कार्यविधियों में अवनति के कारण एनएएल की स्थिति ऐसी रही कि बहुत सुंदर एवं सजी हुई दुल्हन मगर जाएगी कहॉं1 एनएएल लीडरों एवं शुभचिंतको की वेक्तिक कोशिशों के कारण 1980 के प्रारंभ से समय बदलने लगा1 भारत का लघु लड़ाकू वायुयान (एलसीए) को 1983 में सरकार से विधिवत मंजूरी मिल गयी और इस परियोजना के कारण एनएएल के अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों में तेेजी आ गई1 इस दशक के दौरान भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में भी अधिक विकास हुआ1 ये दोनों भारत के डीआरडीओ के मिसाइल विकास कार्यक्रम की मांग एवं सफलता के कारण बने जिनकी वजह से एनएएल के पास अधिक काम मिले1 इसी दशक के दौरान एनएएल को वांतरिक्ष क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हुई1 1990 के दशक में एनएएल बहुत व्यस्त रहा जिसमें राष्ट्रीय वांतरिक्ष कार्यक्रमों में एनएएल की निरंतर शामीलता और नगर विमानन क्षेत्र में खुद का पहल1 समय के साथ एनएएल की प्राथमिकता और भूमिका बदल रही है1 वांतरिक्ष क्षेत्र में देश का एक अत्युत्तक अनुसंधान एवं विकास केन्द्र बनने का संकल्प जिसे एनएएल के 5 निदेशक डॉ पी नीलकंठन, डॉ एस आर वल्लूरी, प्रो. आर नरसिंहा, डॉ के एन राजू और अब डॉ टी एस प्रहलाद द्वारा पूरा किया जा रहा है
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